1938 में, 'युद्ध ऑफ़ द वर्ल्ड्स' नामक एक रेडियो नाटक के प्रसारण से अमेरिका में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी। बहुत से अमेरिकियों ने सोचा कि वे मंगल ग्रह के आक्रमण की वास्तविक खबर सुन रहे हैं। इस प्रसारण ने रेडियो पर जनता के भरोसे को एक आधिकारिक सूचना स्रोत के रूप में उजागर किया। इतिहासकारों का मानना है कि शुरुआती रिपोर्टों में व्यापक दहशत की मात्रा को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया था। फिर भी, यह घटना मीडिया की सार्वजनिक धारणा को प्रभावित करने की शक्ति का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनी हुई है। इसने मीडिया की जिम्मेदारी और जनता की आलोचनात्मक सोच के महत्व को रेखांकित किया। यह प्रसारण अब भी संचार और जन मनोविज्ञान के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण विषय है।