अप्रैल महीने में पंजीकृत वेतन में 3.5% की वृद्धि दर्ज की गई है, जो मुद्रास्फीति की दर से अधिक है। हालांकि, वर्ष के पहले चार महीनों को मिलाकर देखें तो वेतन, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (IPC) की वृद्धि से पीछे रहे हैं। इसका अर्थ है कि लोगों की क्रय शक्ति में गिरावट जारी है। वेतन में वृद्धि के बावजूद, बढ़ती कीमतों के कारण आम लोगों की खर्च करने की क्षमता कम हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति निकट भविष्य में भी बनी रह सकती है। सरकार और आर्थिक विश्लेषक इस मुद्दे पर ध्यान दे रहे हैं ताकि क्रय शक्ति को बनाए रखने के लिए उचित कदम उठाए जा सकें। यह वृद्धि श्रमिकों के लिए कुछ राहत लेकर आई है, लेकिन समग्र आर्थिक परिदृश्य अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।