वोक्सवैगन में एक बड़ा संकट आने की आशंका थी, लेकिन अप्रत्याशित रूप से एक समझौता हो गया है। कंपनी के पुनर्गठन को लेकर एक महत्वपूर्ण संघर्ष की स्थिति बन गई थी, लेकिन अब उसे टाला जा सका है। इस समझौते के साथ, वोक्सवैगन एक उदाहरण के रूप में उभरा है। यह सवाल उठ रहा है कि क्या जर्मनी, जो एक समय औद्योगिक शक्ति हुआ करता था, अब बदलाव की राह पर चलने के लिए तैयार है। यह समझौता जर्मनी की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। क्या जर्मनी अपनी पुरानी औद्योगिक छवि को बदलकर नए युग में प्रवेश कर पायेगा? यह देखना बाकी है।