ब्रिटेन में एक घर खाली करते समय 1990 के दशक की शुरुआत में बना एक मार्स चॉकलेट बार मिला। इस बार की उम्र के साथ-साथ उसका आकार भी चर्चा का विषय बन गया, जो कि आज बाजार में मिलने वाले आकार से काफी बड़ा - 62.5 ग्राम था, जबकि वर्तमान आकार लगभग 40 ग्राम है। इस तुलना ने तुरंत ही सोशल मीडिया पर तूल पकड़ा और “श्रिंकफ्लेशन” (shrinkflation) नामक घटना को फिर से सुर्खियों में ला दिया। श्रिंकफ्लेशन वह प्रक्रिया है जिसमें उत्पादों का आकार या मात्रा कम कर दी जाती है जबकि कीमत वही रखी जाती है। इस खोज ने उपभोक्ताओं के बीच उत्पादों के घटते आकार और बढ़ती कीमतों को लेकर बहस को जन्म दिया है। लोग अब विभिन्न उत्पादों में इसी तरह के बदलावों पर ध्यान दे रहे हैं। यह घटना श्रिंकफ्लेशन के प्रभाव और उपभोक्ता धारणा पर इसके असर को उजागर करती है।

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