प्रसिद्ध अभिनेत्री यरो माने ने हाल ही में राजनीतिक शुद्धता के कारण हास्य और व्यंग्य में आए बदलावों पर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने बताया कि पहले हास्य अधिक तीखा, सटीक और लोगों से जुड़ने वाला होता था। माने के अनुसार, पुराने समय में हास्य कलाकारों को अपनी बात कहने की अधिक स्वतंत्रता थी। उन्होंने उस दौर को भाग्यशाली बताया जब हास्य-व्यंग्य अपने चरम पर था। अभिनेत्री ने वर्तमान समय में हास्य की बदलती प्रकृति पर चिंता व्यक्त की, हालांकि उन्होंने इस बदलाव के कारणों पर विस्तार से चर्चा नहीं की। उनका मानना है कि राजनीतिक शुद्धता के दबाव में हास्य की रचनात्मकता कुछ हद तक सीमित हो गई है।