देश में व्याप्त आर्थिक अस्थिरता के कारण शिक्षक गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए वे शिक्षण के साथ-साथ अन्य वैकल्पिक कार्यों में संलग्न होने को मजबूर हैं। इस स्थिति को 'सर्वाइवल मोड' या अस्तित्व बचाने की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है। यह विवशता न केवल उनके आर्थिक स्तर को प्रभावित कर रही है, बल्कि गहरे मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी डाल रही है। मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से शिक्षकों ने अपनी इस कठिन परिस्थिति और मानसिक तनाव को उजागर किया है। आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि आर्थिक असुरक्षा का स्तर काफी चिंताजनक है। अंततः, यह स्थिति शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है।