वेनेज़ुएला की डेलसी रॉड्रिग्स द्वारा देश के तेल भंडार का २२ प्रतिशत पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को सौंपने के समझौते पर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कई विशेषज्ञों ने इस समझौते की वैधता पर सवाल उठाए हैं, खासकर राष्ट्रीय संप्रभुता और विदेशी हस्तक्षेप के संदर्भ में। आलोचकों का कहना है कि यह समझौता वेनेज़ुएला की आर्थिक स्वतंत्रता को खतरे में डालता है और देश के प्राकृतिक संसाधनों पर विदेशी नियंत्रण को बढ़ाता है। इस समझौते के निहितार्थों को लेकर राजनीतिक और आर्थिक हलकों में बहस छिड़ गई है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम वेनेज़ुएला को तत्काल आर्थिक राहत दिलाने के लिए उठाया गया है, जबकि अन्य इसे एक गंभीर रणनीतिक चूक मानते हैं। इस फैसले से वेनेज़ुएला की भविष्य की पीढ़ियों के लिए संभावित नुकसान की आशंका जताई जा रही है। इस मुद्दे पर आगे जांच और पारदर्शिता की मांग की जा रही है।