वेटिकन ने एक विद्रोही कैथोलिक समूह के सदस्यों को निष्कासित कर दिया है, क्योंकि उन्होंने पोप की मंजूरी के बिना बिशप की नियुक्ति की थी। वेटिकन का कहना है कि बिशप की नियुक्ति केवल पोप द्वारा ही अनुमोदित की जा सकती है। यह कदम यीशु के मूल शिष्यों के साथ प्रेरितिक संबंध बनाए रखने के लिए उठाया गया है। वेटिकन इस मामले में सख्त रुख अपना रहा है ताकि चर्च में अनुशासन और अधिकार स्थापित किया जा सके। अनधिकृत नियुक्तियों को चर्च की एकता और परंपरा के लिए खतरा माना जाता है। इस कार्रवाई से कैथोलिक समुदाय में सदमे की लहर दौड़ गई है, लेकिन वेटिकन ने अपने फैसले पर कायम रहने का संकेत दिया है। यह घटना चर्च के भीतर शक्ति और अधिकार को लेकर जारी बहस को भी उजागर करती है।