वेटिकन ने सेंट पायस एक्स सोसाइटी (Society of St. Pius X) को विधर्मी घोषित किया है, क्योंकि इस गुट ने पोप की सहमति के बिना बिशपों की नियुक्ति कर दी थी। यह गुट यहूदी धर्म के साथ संबंधों को सुधारने के प्रयासों को ठुकराता है, हालाँकि यह यहूदी-विरोधी शिक्षाओं के आरोपों से इनकार करता है। वेटिकन ने इस गुट के बिशपों और पुजारियों को निष्कासित कर दिया है। यह कदम इस गुट के भीतर फूट और वेटिकन के साथ इसके तनावपूर्ण संबंधों को दर्शाता है। सेंट पायस एक्स सोसाइटी पारंपरिक कैथोलिक मान्यताओं पर ज़ोर देती है और द्वितीय वेटिकन परिषद के कुछ सुधारों का विरोध करती है। इस फैसले से कैथोलिक समुदाय में विभाजन और गहरे हो सकते हैं। वेटिकन का यह कदम धार्मिक दुनिया में एक महत्वपूर्ण घटना है।