1969 से 1972 के बीच, अमेरिका ने मस्क थिसल से लड़ने के लिए एक कीट छोड़ा था। शुरुआत में, यह कीट मस्क थिसल को नियंत्रित करने के उद्देश्य से छोड़ा गया था, लेकिन दुर्भाग्यवश इसने स्थानीय थिसल प्रजातियों पर भी हमला करना शुरू कर दिया। इस हमले से स्थानीय थिसल को नुकसान पहुंचा है, जिसमें एक लुप्तप्राय किस्म की बीज उत्पादन क्षमता में भी गिरावट आई है। इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि आक्रामक प्रजातियों को नियंत्रित करने के कार्यक्रमों में सावधानीपूर्वक मूल्यांकन कितना महत्वपूर्ण है। यह जैविक नियंत्रण के प्रयासों में अनपेक्षित परिणामों की संभावना को उजागर करता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि किसी भी प्रजाति को छोड़ने से पहले उसके संभावित प्रभावों का गहन अध्ययन किया जाना चाहिए। इस मामले ने भविष्य में ऐसी योजनाओं के लिए एक चेतावनी के रूप में काम करना चाहिए।