अमेरिकी उपराष्ट्रपति स्विट्जरलैंड में मध्य पूर्व संघर्ष को लेकर ईरान के साथ समझौते के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने बातचीत में प्रगति होने का संकेत दिया है। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को ‘बहुत ज़ोर से’ फिर से निशाना बनाने की संभावना से इनकार नहीं किया है। यह बयान वार्ता की सकारात्मक प्रगति के बावजूद तनावपूर्ण स्थिति को दर्शाता है। व्हाइट हाउस ने अभी तक ट्रंप के बयान पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान वार्ता के दौरान दबाव बनाए रखने की रणनीति हो सकती है। इस स्थिति में, ईरान के साथ राजनयिक समाधान की संभावना अनिश्चित बनी हुई है। यह घटनाक्रम मध्य पूर्व में अस्थिरता को और बढ़ा सकता है।