मध्य पूर्व में अमेरिका की भूमिका को चीन और भारत जैसे देशों द्वारा प्रतिस्थापित किए जाने की संभावना फिलहाल कम है। मध्य पूर्व संस्थान के वार्षिक सम्मेलन में विश्लेषकों ने यह राय व्यक्त की है। उनका कहना है कि इन देशों का प्रभाव सैन्य उपस्थिति के पारंपरिक रूप में नहीं होगा। ईरान में युद्ध की स्थिति बदलने के बावजूद, अमेरिका की जगह लेना आसान नहीं है। विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन और भारत आर्थिक और राजनयिक स्तर पर अपनी भूमिका बढ़ा सकते हैं, लेकिन सैन्य हस्तक्षेप की संभावना कम है। मध्य पूर्व की जटिल भू-राजनीतिक स्थिति को देखते हुए, अमेरिका का प्रभाव अभी भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। विश्लेषकों के अनुसार, क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अमेरिका की भूमिका को पूरी तरह से अनदेखा नहीं किया जा सकता।