संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हवाई हमले शुरू किए, जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई लक्ष्य निर्धारित किए थे। इन लक्ष्यों में ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करना और यह सुनिश्चित करना शामिल था कि तेहरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न करे। युद्ध के आरंभिक चरण में ट्रंप प्रशासन का उद्देश्य ईरान के सैन्य बुनियादी ढांचे को कमजोर करना और उसकी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रोकना था। हालांकि, इन लक्ष्यों को पूरी तरह से हासिल किया गया है या नहीं, यह अभी भी स्पष्ट नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत किया है और जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता रखता है। इस संघर्ष का क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है और आगे भी तनाव बढ़ने की आशंका है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए, यह कहना मुश्किल है कि क्या यह युद्ध ट्रंप के निर्धारित उद्देश्यों को पूरा कर पाएगा।