अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते पर विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है। पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प ने युद्ध से पहले खुले हुए जलमार्ग को फिर से खोला है। इस समझौते के परिणामस्वरूप ईरान की कट्टरपंथी 'पासداران' सेना मजबूत हुई है, जिसने समझौते के दौरान अपनी स्थिति का बचाव किया। यह समझौता दोनों देशों के बीच शक्ति संतुलन में बदलाव का संकेत देता है। विश्लेषकों का मानना है कि इस समझौते से किसे सबसे ज़्यादा लाभ हुआ है, यह कहना मुश्किल है। समझौते के बाद क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं। यह समझौता भविष्य में दोनों देशों के संबंधों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
