अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए समझौते को समर्थकों ने ऐतिहासिक बताया है, लेकिन मध्य पूर्व के कई देशों में इसे लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इजराइल, खाड़ी देशों और लेबनान के विभिन्न गुटों को डर है कि यह समझौता ईरान को अधिक सुरक्षित और शक्तिशाली बनाएगा। यह ईरान की वैधता को भी बढ़ा सकता है, जिससे क्षेत्र में उसका प्रभाव और भी अधिक होगा। विश्लेषकों का मानना है कि इस समझौते से मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन में महत्वपूर्ण बदलाव आएगा। ईरान के विरोधी इस समझौते को अपने हितों के खिलाफ मानते हैं और इसके दीर्घकालिक परिणामों को लेकर आशंकित हैं। यह समझौता 1979 की ईरानी क्रांति के बाद अमेरिका और ईरान के राष्ट्रपतियों के बीच हस्ताक्षरित पहला समझौता है। इस समझौते के परिणामस्वरूप ईरान की क्षेत्रीय भूमिका में वृद्धि होने की संभावना है।
