अमेरिकी मीडिया संगठन सीएनएन के विश्लेषण के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच एक गोपनीय 14-सूत्रीय समझौते में ‘जमे हुए’ धन, तेल और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। इस समझौते की शर्तों के अनुसार, तेहरान अपनी मांगों को पूरा करने में सफल रहा है, जबकि बदले में बहुत कम रियायतें दे रहा है। रिपोर्ट में पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों पर भी सवाल उठाए गए हैं। यह समझौता दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में एक कदम हो सकता है, लेकिन इसकी शर्तों को लेकर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता ईरान को आर्थिक रूप से मजबूत कर सकता है, जबकि अमेरिका को इसके बदले में पर्याप्त लाभ नहीं मिल रहा है। इस समझौते के दीर्घकालिक परिणाम अभी स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन यह मध्य पूर्व की भू-राजनीति पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
