अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौते की रूपरेखा तैयार हो रही है, जिससे दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव कम हो सकते हैं। इस समझौते के तहत, 300 अरब डॉलर का एक निजी निवेश कोष स्थापित किया जा सकता है, जिसका उद्देश्य ईरान में निवेश और पुनर्निर्माण को बढ़ावा देना है। इस कोष के बनने से ओर्मुज जलडमरूमध्य में लगे प्रतिबंधों को हटाने की भी उम्मीद है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में सुधार होगा। समझौते में 12 मुख्य शर्तें शामिल हैं और लेबनान की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, वाशिंगटन में इस समझौते को लेकर कुछ मतभेद भी हैं। यह समझौता ईरान में विदेशी पूंजी के प्रवाह को प्रोत्साहित कर सकता है और क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान दे सकता है। इस संभावित समझौते से युद्ध समाप्त होने और आर्थिक सुधार की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
