अमेरिका और ईरान के बीच हुए नए समझौते पर इजराइल में निराशा व्यक्त की जा रही है। इजरायली मीडिया और विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता इजराइल को अलग-थलग करता है। कई लोगों का कहना है कि यह समझौता 2015 में बराक ओबामा के कार्यकाल के दौरान हुए समझौते के समान है। इजराइल की मुख्य चिंता ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है, और इस समझौते से उस चिंता में वृद्धि हुई है। इजरायली पक्ष का मानना है कि यह समझौता ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से नहीं रोकेगा। इस समझौते के परिणामस्वरूप इजराइल की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यह समझौता क्षेत्रीय स्थिरता पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।