अमेरिका ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद मानवता की चेतना से उपजे अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय पर अपने हमलों को बढ़ा दिया है। ये हमले पुराने ढंग के हैं और न्यायालय की स्वतंत्रता को कमजोर करने का प्रयास करते हैं। लेखक फर्नांडो रोड्रिगेज का मानना है कि यह कार्रवाई न्यायालय के कार्यों के प्रति अमेरिका की असहमति का परिणाम है। यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय कानून और न्याय के लिए चिंताजनक है। यह हस्तक्षेप न्यायालय की निष्पक्षता और प्रभावशीलता पर सवाल उठाता है। अमेरिका का यह कदम वैश्विक स्तर पर भी राजनीतिक तनाव बढ़ा सकता है। इस मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने और अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय की रक्षा करने की आवश्यकता है।