इतिहासकार एलियास पिनो इटुरिएटा ने कहा है कि वेनेज़ुएला में सरकार और नेशनल असेंबली 2015 के बीच चल रही वार्ता एक अभूतपूर्व प्रक्रिया है, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका की सीधी भागीदारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि दोनों गुटों के प्रतिनिधि "आज्ञाकारी मोहरे" की तरह काम कर रहे हैं। पिनो इटुरिएटा का मानना ​​है कि अमेरिका इस वार्तालाप का वास्तविक संचालक है, और दोनों पक्ष उसकी रणनीति के अनुसार आगे बढ़ रहे हैं। यह स्थिति वेनेज़ुएला की राजनीतिक स्वायत्तता के लिए चिंताजनक है। उनका आकलन है कि संयुक्त राज्य अमेरिका का प्रभाव इस प्रक्रिया को निर्देशित कर रहा है और उसके परिणामों को आकार दे रहा है। इस हस्तक्षेप से वेनेज़ुएला के भीतर एक निष्पक्ष और स्वतंत्र समाधान खोजना मुश्किल हो जाएगा।