यह लेख अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर लिखा गया है। यह उत्सव एक ऐसे समय में आ रहा है जब दुनिया भर में लोकतांत्रिक मूल्यों में गिरावट देखी जा रही है। यह चिंताजनक स्थिति केवल बाहरी दुनिया तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वयं अमेरिका के भीतर भी महसूस की जा रही है। लेख में इसे एक 'उदारवाद विरोधी' या निरंकुश प्रतिगमन के दौर के रूप में वर्णित किया गया है। हालांकि, लेखक स्पष्ट करते हैं कि इस गिरावट के लिए अमेरिका की स्वतंत्रता की घोषणा जिम्मेदार नहीं है। इसके साथ ही, देश के संस्थापक पिताओं को भी इस वर्तमान स्थिति के लिए दोषी नहीं ठहराया गया है। यह विश्लेषण उत्सव और वर्तमान राजनीतिक संकट के बीच के विरोधाभास को दर्शाता है।

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