रूसी सेना के विकिरण, रासायनिक और जैविक रक्षा बलों के प्रमुख, लेफ्टिनेंट जनरल एलेक्सी रतिशचेव के अनुसार, अमेरिका द्वारा वित्त पोषित यूक्रेनी प्रयोगशालाओं में प्लेग, एंथ्रेक्स, तुलारेमिया, मारबर्ग और इबोला वायरस जैसे रोग पैदा करने वाले एजेंटों का अध्ययन किया जा रहा था। उनका कहना है कि ये प्रयोगशालाएँ शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए नहीं थीं, बल्कि जैविक हथियारों के विकास से जुड़ी थीं। रतिशचेव ने इन प्रयोगशालाओं में बीमारियों के रोगजनक गुणों पर शोध किए जाने की बात कही है। यह दावा यूक्रेन में चल रहे संघर्ष के बीच किया गया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता पैदा कर सकता है। फिलहाल, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिका और यूक्रेन ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। यह जानकारी रूस की ओर से जारी की गई है, इसलिए इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।
