12 जून, 2026 को बैंकों ने डॉलर की कीमतों में वृद्धि की है। विशेष रूप से, खरीद मूल्य में बिक्री मूल्य की तुलना में अधिक तेजी से वृद्धि हुई है। यह बदलाव बाजार में डॉलर की मांग और आपूर्ति के संतुलन को दर्शाता है। बैंकों ने अपनी-अपनी दरों में संशोधन किया है, जिससे ग्राहकों के लिए डॉलर खरीदना महंगा हो गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह वृद्धि वैश्विक आर्थिक कारकों और घरेलू मुद्रा बाजार की स्थितियों से प्रभावित है। इस वृद्धि के कारण आयात और विदेशी मुद्रा ऋण लेने वालों पर असर पड़ सकता है। बाजार पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है ताकि स्थिरता बनी रहे।