न्यूयॉर्क टाइम्स के एक विश्लेषण के अनुसार, मध्य पूर्व में अमेरिका द्वारा हथियारों की तीव्र खपत ने यूरोप और एशिया के लिए निर्धारित आपूर्ति को बाधित कर दिया है, जिससे एक लॉजिस्टिक संकट उत्पन्न हो गया है। अमेरिका के भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों – रूस और चीन – पहले से ही अपने जासूसी उपग्रहों के माध्यम से स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प की ईरान के खिलाफ युद्ध नीति के कारण अमेरिका का शस्त्र भंडार कम हो गया है। यह स्थिति अमेरिका के लिए एक रणनीतिक कमजोरी पैदा करती है। इस भू-राजनीतिक परिवर्तन से रूस और चीन को लाभ मिलने की संभावना है। हथियारों की कमी से अमेरिका की वैश्विक प्रतिबद्धताओं को बनाए रखने की क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं। यह स्थिति क्षेत्र में शक्ति संतुलन को भी बदल सकती है।