1980 के दशक में, उरुग्वे यूरोप में ईटा (ETA) नामक बास्क अलगाववादी संगठन का निशाना बना था। ईटा ने उरुग्वे में कई हमले किए और धमकियां दीं, जिसका उद्देश्य स्पेन में अपनी गतिविधियों को जारी रखने के लिए राजनीतिक समर्थन हासिल करना था। स्पेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री फ़ेलिपे गोंजालेज ने उरुग्वे के राष्ट्रपति लुइस अल्बर्टो लाकाल्ले हेरेरा पर ईटा के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए दबाव डाला। इस दौरान, "अंतर्राष्ट्रीयवादियों" नामक सशस्त्र समूहों ने भी भूमिका निभाई, और एक डाक टिकट भी चोरी किया गया जिसका इस्तेमाल ईटा द्वारा किया गया था। यह घटनाक्रम उरुग्वे की राजनीति और सुरक्षा के लिए एक चुनौतीपूर्ण समय था, और इसने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में जटिलताएँ पैदा कीं। हाल ही में सामने आई जानकारी से इस मामले की नई परतें सामने आई हैं, जिससे यह पता चलता है कि उरुग्वे ईटा की गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया था।