भ्रष्टाचार निगरानी संस्था (ICAC) को जानकारी मिली है कि यूनिवर्सिटी ऑफ़ वोलोंगोंग के एक प्रबंधक से अनुबंध की समय-सीमा बदलने का अनुरोध किया गया था। यह अनुरोध एक वरिष्ठ कर्मचारी और एक परामर्श अनुबंध के बीच संभावित हितों के टकराव को छिपाने के लिए किया गया था, जिसका मूल्य अंततः 3.7 मिलियन डॉलर था। आरोपों के अनुसार, समय-सीमा में बदलाव करके टकराव को उजागर होने से रोकने की कोशिश की गई। यह मामला एक महत्वपूर्ण अनुबंध से जुड़ा है और इसमें विश्वविद्यालय के उच्च पदस्थ अधिकारी शामिल हैं। ICAC इस मामले की गहन जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या वास्तव में कोई भ्रष्टाचार हुआ था। जांच में अनुबंध प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
