नए वित्तीय वर्ष के शुरू हुए एक महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन रजिस्ट्रार के पदों के रिक्त होने के कारण विश्वविद्यालयों में खर्च करने की अनुमति नहीं मिल पा रही है। इसके चलते महत्वपूर्ण कार्यों में बाधा आ रही है। रजिस्ट्रार की अनुपस्थिति में बजट अनुमोदन प्रक्रिया में देरी हो रही है, जिससे विश्वविद्यालयों के दैनिक कामकाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। विश्वविद्यालयों के अधिकारी इस समस्या को दूर करने के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। इस विलंब से शोध कार्यों, बुनियादी ढांचे के विकास और छात्रों की सुविधाओं से जुड़े प्रस्ताव लंबित हैं। स्थिति को जल्द से जल्द सामान्य करने के लिए रजिस्ट्रार पद पर नियुक्ति की आवश्यकता है। यह देरी उच्च शिक्षा संस्थानों के सुचारू संचालन के लिए एक गंभीर चुनौती बन गई है।