पेरिस में बवेरियन पारंपरिक मोज़े (Trachtenstrümpfe) खोजने की एक असामान्य घटना सामने आई है। लेखिका को इन मोज़ों की सख्त ज़रूरत थी, लेकिन उन्हें पेरिस में खोजने में कठिनाई हो रही थी। आश्चर्यजनक रूप से, मदद उन ईरानी शरणार्थियों से मिली जो जर्मनी में बवेरिया क्षेत्र से परिचित थे। इन शरणार्थियों ने लेखिका को मोज़े ढूंढने में सहायता की, जिससे एक अप्रत्याशित मित्रता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का अवसर मिला। यह घटना दर्शाती है कि कैसे विभिन्न संस्कृतियों के लोग एक-दूसरे की मदद कर सकते हैं, भले ही उनकी पृष्ठभूमि कितनी भी अलग क्यों न हो। यह कहानी पेरिस में जर्मन संस्कृति की दुर्लभता और अप्रत्याशित जगहों पर मिलने वाली मदद पर प्रकाश डालती है। यह एक कॉलम का हिस्सा है जो इस अनोखे अनुभव को साझा करता है।