संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए मध्य पूर्व शांति समझौते पर खेद व्यक्त किया है। उनका कहना है कि यह समझौता ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर पूरी तरह से चुप है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते में मानवाधिकारों के मुद्दे को शामिल करना आवश्यक था। समझौते में इस महत्वपूर्ण पहलू की अनदेखी से ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति और खराब हो सकती है। संयुक्त राष्ट्र ने इस कमी को दूर करने और मानवाधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। यह समझौता, जिसका उद्देश्य मध्य पूर्व में युद्ध को समाप्त करना है, मानवाधिकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने में विफल रहा है। विशेषज्ञों ने इस मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया है।