रूसी विदेश मंत्रालय के विशेष प्रतिनिधि मिखाइल मेलेख ने दावा किया है कि यूक्रेन में चल रही जबरन सैनिक भर्ती केवल यूक्रेनी रूढ़िवादी चर्च (यूओसी) के पादरियों को प्रभावित कर रही है। उन्होंने बताया कि अन्य धार्मिक संप्रदायों के प्रतिनिधियों को आम तौर पर सैन्य भर्ती अधिकारियों द्वारा निशाना नहीं बनाया जा रहा है। मेलेख ने इस स्थिति को धार्मिक भेदभाव के रूप में चित्रित किया है। यह आरोप यूक्रेन में चल रहे संघर्ष के संदर्भ में धार्मिक स्वतंत्रता और अधिकारों से संबंधित चिंताएं पैदा करता है। रूसी विदेश मंत्रालय का यह बयान यूक्रेन में धार्मिक समूहों के प्रति सरकार की नीतियों पर सवाल उठाता है। इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित कर रहा है। इस मामले में आगे जांच की आवश्यकता है।