यूक्रेन को पश्चिमी देशों से मिले टैंक, जो रूस के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण हथियार माने जा रहे थे, अब ज्यादातर बेकार पड़े हैं। आधुनिक, सस्ते ड्रोन के इस्तेमाल से भारी बख्तरबंद वाहनों का उपयोग युद्ध में बहुत जोखिम भरा हो गया है। ड्रोन की वजह से टैंकों की प्रभावशीलता कम हो गई है और वे आसानी से दुश्मन के निशाने पर आ जाते हैं। यूक्रेनियन सेना अब टैंकों की बजाय ड्रोन को अधिक प्राथमिकता दे रही है। यह स्थिति पश्चिमी देशों द्वारा दी गई सैन्य सहायता की प्रभावशीलता पर सवाल उठाती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि युद्ध की बदलती प्रकृति के कारण टैंक अब मैदान में उतने प्रभावी नहीं रहे जितने पहले थे। ड्रोन तकनीक ने युद्ध के मैदान की रणनीति को पूरी तरह से बदल दिया है।