यूक्रेन युद्ध में रूसी सेना की स्थिति कमजोर होती जा रही है। तकनीकी तौर पर रूस पिछड़ रहा है, और उसके मानव संसाधन तथा तेल भंडार में भी कमी आ रही है। वहीं, यूक्रेनी सेना, जो एक गतिशील और नवीन रक्षा उद्योग द्वारा समर्थित है, अभी तक जमीनी लड़ाई में निर्णायक रूप से आक्रामक रुख अपनाने में सफल नहीं हो पाई है। रूस की सेना की प्रगति रुक गई है, और वह पहल खो चुकी है। यूक्रेनी सेना का लचीला प्रतिरोध रूस के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। हालाँकि, यूक्रेन को भी अभी तक निर्णायक सफलता नहीं मिली है। यह संघर्ष एक गतिरोध की स्थिति में पहुँच गया है, जिसमें दोनों पक्षों को भारी नुकसान हो रहा है।

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