रूस-यूक्रेन युद्ध में दोनों पक्ष एक-दूसरे की लॉजिस्टिक्स को नष्ट करने पर केंद्रित हैं, लेकिन उनकी रणनीतियाँ भिन्न हैं। रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने ईंधन की कमी की समस्या स्वीकार की है, लेकिन समाधान खोजने में विफल रहे हैं। मास्को में वायु रक्षा प्रणालियों को मजबूत किया जा रहा है, जिससे यूक्रेनी बैलिस्टिक मिसाइलों के संभावित उपयोग की आशंका है। हाल ही में, ‘फ्लेमिंगो’ नामक ड्रोन ने एक रूसी हथियार कारखाने पर हमला किया, जो ‘इस्कंदर’ मिसाइलों के पुर्जे भी बनाता है। यह हमला कारखाने की उत्पादन क्षमता को बाधित कर सकता है। युद्ध के मैदान पर, ईंधन आपूर्ति एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है, और दोनों पक्ष इसे बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं। स्थिति लगातार बदल रही है और आगे की कार्रवाई अनिश्चित है।