यूक्रेन के ड्रोन हमलों में से ५४ का विश्लेषण करते हुए, ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ ने पाया कि आधे से ज़्यादा हमलों का मकसद कच्चे तेल को ईंधन में बदलने वाले संयंत्रों को नुक़सान पहुंचाना था। ये हमले विशेष रूप से रिफाइनरी के उन हिस्सों को निशाना बना रहे हैं जिन्हें ठीक करना मुश्किल है, क्योंकि प्रतिबंधों के कारण पुर्जों की आपूर्ति बाधित हो गई है। यूक्रेन का यह नया तरीका रूस की ईंधन उत्पादन क्षमता को कम करने की रणनीति का हिस्सा है। इन हमलों से रूस की रिफाइनिंग क्षमता पर असर पड़ रहा है और ईंधन की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यूक्रेन विशेष रूप से उन उपकरणों को निशाना बना रहा है जो ईंधन उत्पादन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हैं। इससे रूस के लिए अपनी रिफाइनरी को चालू रखना और ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना मुश्किल हो जाएगा। यूक्रेन का मानना है कि रिफाइनरी पर हमले, रूस पर आर्थिक दबाव बनाने का एक प्रभावी तरीका है।