यूक्रेन ने शांति वार्ता का प्रस्ताव रखा है, लेकिन रूस क्यों सहमत नहीं हो रहा है? यह प्रश्न वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान स्थिति महात्मा गांधी के अहिंसावादी दृष्टिकोण से बिल्कुल विपरीत है, जहाँ अब शक्ति प्रदर्शन और सैन्य कार्रवाई को प्राथमिकता दी जा रही है। रूस की अनिच्छा, अंतरराष्ट्रीय नियमों और समझौतों के प्रति अनादर को दर्शाती है। यह स्थिति वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा है। वार्ता की विफलता से संघर्ष और बढ़ सकता है, जिससे मानवीय संकट गहराएगा। इस परिदृश्य में, कूटनीति और संवाद की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।