यूक्रेन के एफ-16 लड़ाकू विमानों को मिसाइलों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। रूसी ड्रोन का सामना करने के लिए पायलट अब विमान में लगी एम61ए1 वल्कन तोप का उपयोग कर रहे हैं। यह एक जोखिम भरा कदम है, क्योंकि तोप के गोले नीचे नागरिकों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उपलब्ध एआईएम मिसाइलों को कीव की रक्षा के लिए भी इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे उनकी संख्या और कम हो गई है। इस स्थिति ने यूक्रेन की वायु रक्षा क्षमताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मिसाइलों की कमी के कारण, पायलटों को अब अधिक जोखिम उठाने पड़ रहे हैं और नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। यूक्रेन को पश्चिमी देशों से और अधिक मिसाइलों की आवश्यकता है।

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