रूस वर्तमान में 1990 के दशक के बाद के सबसे गंभीर ईंधन संकट का सामना कर रहा है। यूक्रेन द्वारा रूस के दक्षिणी कुबान क्षेत्र में स्थित स्लाव्यंस्क रिफाइनरी पर किए गए ड्रोन हमलों ने इस स्थिति को और बदतर बना दिया है। तेल बुनियादी ढांचे पर हुए इन हमलों के कारण देश में ईंधन की भारी कमी हो गई है। कई पेट्रोल पंपों पर ईंधन पूरी तरह समाप्त हो गया है, जबकि कुछ जगहों पर यह केवल सीमित मात्रा और ऊंची कीमतों पर उपलब्ध है। ईंधन खरीदने के लिए रूसी नागरिकों को लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ रहा है। अंततः, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी इस संकट और उससे जुड़ी समस्याओं को स्वीकार किया है।
