यूके के प्रधानमंत्री ने दशकों पहले हुई जबरन गोद लेने की घटनाओं पर गहरी खेद व्यक्त किया है। इस घृणित कांड में कई माताओं, जिनमें किशोर भी शामिल थीं, पर सामाजिक, संस्थागत और पारिवारिक दबाव डालकर उनसे उनके बच्चों को छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। यह दबाव इतना अधिक था कि माताओं के पास अपनी मर्जी से कोई विकल्प नहीं बचा था। प्रधानमंत्री ने पीड़ितों और उनके परिवारों से माफ़ी माँगी है और इस तरह की घटनाओं को दोबारा न होने देने का संकल्प लिया है। यह मामला यूके के इतिहास में एक काला अध्याय है, जहाँ मानवीय अधिकारों का हनन हुआ। सरकार अब इस मामले की पूरी जाँच करने और पीड़ितों को उचित मुआवज़ा देने पर विचार कर रही है। इस घटना ने यूके में गोद लेने की नीतियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।