संग्रहालयों को अनुसंधान निधि में बदलाव से अपनी परियोजनाओं को खतरे में पड़ने का डर है और वे इस फैसले पर पुनर्विचार करने की उम्मीद कर रहे हैं। यह परिवर्तन संग्रहालयों द्वारा किए जा रहे महत्वपूर्ण शोध कार्यों को बाधित कर सकता है। संग्रहालयों का कहना है कि यह निधि उनके संग्रहों को समझने, संरक्षित करने और प्रदर्शित करने के लिए आवश्यक है। वे इस बात पर जोर दे रहे हैं कि अनुसंधान संग्रहालयों के शैक्षिक और सांस्कृतिक योगदान का एक अभिन्न अंग है। संग्रहालयों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने और अनुसंधान निधि को बहाल करने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि अनुसंधान में निवेश देश की सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। इस फैसले से संग्रहालय समुदाय में निराशा है और भविष्य की परियोजनाओं पर अनिश्चितता का माहौल है।