सरकार द्वारा 1.2 मिलियन घरों के निर्माण के वादे को पूरा करने की समय-सीमा पर संदेह बढ़ गया है। सरकारी सलाहकारों का अनुमान है कि यह लक्ष्य समय पर हासिल करना मुश्किल होगा। आवास डेवलपर्स, बिल्डर्स और निवेशकों की निगाहें अब बाजार की स्थिति पर टिकी हैं। बाजार में स्थिरता या और गिरावट की आशंका जताई जा रही है। निर्माण क्षेत्र में मंदी और आर्थिक अनिश्चितता के कारण यह विलंब हो सकता है। इस स्थिति से घर खरीदने वालों पर भी असर पड़ेगा, जिन्हें अब अपने सपनों के घर के लिए और इंतजार करना पड़ सकता है। सरकार इस समस्या से निपटने के लिए नए कदम उठाने पर विचार कर रही है।