यूके ने विदेशी सहायता बजट में कटौती की है, जिसके परिणामस्वरूप कुछ अफ्रीकी देशों को मिलने वाली द्विपक्षीय सहायता में 90% तक की कमी आई है। विदेश कार्यालय के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। इस कटौती का प्रभाव अगले तीन वर्षों तक दिखाई देगा। आलोचकों का कहना है कि यह कदम अंतर्राष्ट्रीय मंच पर यूके की भूमिका के बारे में एक संदेश भेजता है। श्रम पार्टी की नीतियों के कारण यह कटौती हुई है। रिपोर्ट में प्रत्येक देश पर पड़ने वाले प्रभाव का विस्तृत विवरण दिया गया है। यह कटौती विकासशील देशों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।