तुवालू के प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन से प्रभावित द्वीपीय देशों को कार्बन उत्सर्जन करने वाले देशों से क्षतिपूर्ति दिए जाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है। उनका तर्क है कि जलवायु परिवर्तन के लिए ज़िम्मेदार देशों को सहायता प्रदान करनी चाहिए या अपने कार्यों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण द्वीपीय राष्ट्र अस्तित्व के खतरे का सामना कर रहे हैं। उन्होंने उत्सर्जन करने वाले देशों से वित्तीय सहायता और अन्य प्रकार के समर्थन का आह्वान किया है। यह मांग जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति वैश्विक उत्तरदायित्व और न्याय की आवश्यकता को रेखांकित करती है। इस मुद्दे पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान देने और ठोस कार्रवाई करने की आवश्यकता है ताकि इन देशों को भविष्य में सुरक्षित किया जा सके। यह बयान पोस्ट कूरियर में प्रकाशित हुआ।