पिछले ढाई दशकों से तुर्की और पश्चिमी देशों के बीच तनाव के कारण विश्लेषकों में इस बात की चिंता रही है कि तुर्की नाटो से दूर हो सकता है। इसकी शुरुआत 2003 में हुई जब तुर्की ने इराक आक्रमण के लिए अमेरिकी सेना को अपनी जमीन इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी। 2010 में ईरान पर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों के खिलाफ तुर्की के मतदान ने इन आशंकाओं को और बढ़ा दिया। वर्ष 2017 में रूस से S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदने के बाद यह डर और गहरा गया कि नाटो की दूसरी सबसे बड़ी सैन्य शक्ति अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी के करीब जा रही है। 'फॉरेन अफेयर्स' के एक विश्लेषण के अनुसार, पुतिन और एर्दोगन के बीच ठंडे होते रिश्तों ने एक नया मोड़ लिया है। अब तुर्की का गुप्त रूप से पश्चिमी गठबंधन की ओर पुनर्गठन होना नाटो के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। यह स्थिति रूस के लिए नुकसान और पश्चिम के लिए एक रणनीतिक जीत के रूप में देखी जा रही है।
