तुर्की में 2016 में हुए असफल तख्तापलट की बरसी पर, कई सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं। इस घटना ने देश को गहराई से प्रभावित किया, लेकिन सच्चाई अभी भी अस्पष्ट है। राष्ट्रपति एर्दोगान इस मामले की निष्पक्ष जांच करने में कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं। पीड़ितों और उनके परिवारों को न्याय मिलने की उम्मीद कम होती जा रही है। आलोचकों का कहना है कि सरकार इस घटना का उपयोग असंतोष को दबाने के लिए कर रही है। तख्तापलट के बाद हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया और उनकी नौकरियां चली गईं। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है, लेकिन अभी तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकला है।

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