वाशिंगटन इंस्टीट्यूट फॉर नियर ईस्ट पॉलिसी के एक विश्लेषण के अनुसार, अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद से तुर्की, ईरान और चीन के बाद समूह का तीसरा सबसे प्रमुख राजनयिक साझेदार रहा है। यह विश्लेषण 15 अगस्त, 2021 से 15 अगस्त, 2026 तक तालिबान की राजनयिक गतिविधियों को ट्रैक करता है, जब समूह ने काबुल पर कब्ज़ा कर लिया था। विश्लेषण में हजारों राजनयिक मुलाकातों की जांच की गई है। तुर्की ने इस अवधि में तालिबान के साथ महत्वपूर्ण राजनयिक संबंध बनाए रखे हैं, जो क्षेत्रीय स्थिरता और संवाद के प्रयासों को दर्शाता है। यह डेटा तालिबान की अंतर्राष्ट्रीय मान्यता और जुड़ाव की जटिलताओं को उजागर करता है। ईरान और चीन इस मामले में सबसे आगे हैं, जो अफगानिस्तान में अपने प्रभाव को बनाए रखने के लिए सक्रिय रूप से तालिबान के साथ बातचीत कर रहे हैं। तुर्की की भूमिका भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह क्षेत्र में एक मध्यस्थ के रूप में कार्य कर सकता है।