यह लेख ट्यूनीशिया की भू-राजनीतिक और सांस्कृतिक पहचान पर सवाल उठाता है। आम धारणा है कि ट्यूनीशिया भूमध्यसागरीय क्षेत्र का हिस्सा है, जिसके प्रमाण इसके बंदरगाह, प्रकाश और ऐतिहासिक संबंध जैसे कार्थेज से लेकर व्यापारिक केंद्रों तक हैं। ये केंद्र सदियों से ट्यूनिस, पालेर्मो, मार्सिले और अलेक्जेंड्रिया के बीच वस्तुओं, विश्वासों और ज्ञान का आदान-प्रदान करते रहे हैं। लेखक इस स्थापित पहचान की जांच करता है, सुझाव देता है कि इतिहास भौगोलिक निश्चितताओं को भी चुनौती दे सकता है। यह लेख ट्यूनीशियाई पहचान की जटिलता और समय के साथ इसके संभावित बदलाव पर प्रकाश डालता है। यह भूमध्यसागरीय पहचान की धारणा पर पुनर्विचार करने का आह्वान करता है। यह बिजनेस न्यूज़ पर प्रकाशित हुआ था।