ट्यूनीशिया में, कुछ लोग सुलह और कैदियों की स्थिति को सुलझाने के लिए बनाए गए एक तंत्र के निष्कर्षों का चार साल से अधिक समय से इंतजार कर रहे हैं। यह स्थिति सैमुअल बेकेट के "वेटिंग फॉर गॉडोट" के समान है, जिसमें व्लादिमीर और एस्ट्रागन एक ऐसे व्यक्ति की प्रतीक्षा करते हैं जो कभी नहीं आता। कैस सईद, ट्यूनीशिया के राष्ट्रपति, अब इस स्थिति पर जवाबदेही मांग रहे हैं। यह लेख "बिजनेस न्यूज़" में प्रकाशित हुआ है और प्रक्रिया में उत्पन्न गतिरोध पर प्रकाश डालता है। यह तंत्र, जिसका उद्देश्य सुलह को बढ़ावा देना और कैदियों की समस्याओं का समाधान करना था, अभी तक कोई ठोस परिणाम नहीं दे पाया है। राष्ट्रपति सईद का हस्तक्षेप इस मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है।