ट्यूनीशिया में राजनीतिक स्थिति को लेकर तनाव बढ़ रहा है। 13 जून तक, प्रधानमंत्री को राष्ट्रपति भवन में अंतिम सार्वजनिक सुनवाई के बाद एक महीना बीत चुका है। हालांकि राष्ट्रपति 19 मई को कासबाह गए थे और प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी, लेकिन यह मुलाकात सार्वजनिक नहीं थी। इस चुप्पी ने राजनीतिक विश्लेषकों और जनता के बीच चिंता पैदा कर दी है। यह घटनाक्रम देश में शासन व्यवस्था को लेकर एक असामान्य स्थिति को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गतिरोध देश की राजनीतिक स्थिरता के लिए हानिकारक हो सकता है। यह स्थिति ट्यूनीशिया की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के भविष्य पर सवाल खड़े करती है।