ट्यूनीशिया में सामुदायिक उद्यमों की स्थापना के बावजूद वे अपेक्षित सफलता प्राप्त करने में विफल रहे हैं। एक हालिया विश्लेषण के अनुसार, इन उद्यमों को मिलने वाले विशेष लाभ ही उनकी विफलता का मुख्य कारण बन गए हैं। राष्ट्रपति आदेश द्वारा स्थापित नियमों में ही कुछ ऐसी कमज़ोरियाँ हैं जो इनके संचालन में बाधा उत्पन्न कर रही हैं। यह विश्लेषण दर्शाता है कि इन उद्यमों को दी गई रियायतें, उन्हें बाजार में प्रतिस्पर्धा करने से रोकती हैं और आत्मनिर्भरता विकसित करने में असमर्थ बनाती हैं। परिणामस्वरूप, ये उद्यम आर्थिक रूप से टिकाऊ नहीं बन पा रहे हैं। 'कैपिटालिस' नामक प्रकाशन में प्रकाशित इस रिपोर्ट से ट्यूनीशियाई अर्थव्यवस्था में सामुदायिक उद्यमों की भूमिका पर सवाल उठते हैं और नीति निर्माताओं के लिए पुनर्विचार की आवश्यकता पर बल दिया गया है। इस विफलता के कारणों की गहन जांच से भविष्य में बेहतर नीतियां बनाने में मदद मिल सकती है।
