अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्यावधि चुनावों तक ईरान पर हमले न करने का वादा किया है, लेकिन इस घोषणा से व्यापक युद्ध के डर में खास कमी नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वादा केवल राजनीतिक रणनीति हो सकती है। ईरान के साथ तनाव पहले से ही बहुत अधिक है, और ट्रंप प्रशासन की नीतियां स्थिति को और भी खराब कर सकती हैं। इस क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई से स्थिति अनियंत्रित हो सकती है। पाकिस्तान, जो ईरान का पड़ोसी देश है, इस संभावित संघर्ष से चिंतित है, क्योंकि इससे क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा हो सकता है। यह वादा ईरान के साथ बातचीत के लिए एक अवसर प्रदान कर सकता है, लेकिन इसके लिए दोनों पक्षों को गंभीर प्रयास करने होंगे।

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